कोरोना काल में हेल्थ इंश्योरेंस लेने का बना रहे हैं प्लान, तो देखें इसमें इलाज के अलावा कोरोना टेस्ट और दूसरे खर्चे भी कवर होंगे या नहीं

आज यानी 28 जून को देश में नेशनल इंश्योरेंस अवेयनेस डे मनाया जा रहा है। यह दिन लोगों को इंश्योरेंस पॉलिसी का महत्व बताने के उद्देश्य के तहत शुरू किया गया था। आज इस मौके पर हम आपको बता रहे हैं कि अगर आप कोई ऐसाहेल्थ इंश्योरेंस लेना चाहते हैं जिसमें कोरोनावायरस का इलाज भी कवर हो, तो आपको इस दौरान इस बात का विशेष ध्यान देना चाहिए कि इलाज में क्या-क्या कवर होगा। यहां जानें कि हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।


कोरोनावायरस जैसी महामारी कवर होंगी या नहीं?
हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लेने से पहले इस बात का ध्यान रखें की इसमें सभी बीमारियों के अलावा महामारी जैसे स्वाइल फ्लू या कोरोनावायरस के इलाज का खर्च कवर है या नहीं एचडीएफसी एग्रो हेल्थ इंश्योरेंस के ब्रांच मैनेजर अतुल सागर ने बताया कि कोई भी व्यक्ति जिसने किसी भी कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस ले रखा हो, वह कोरोना के इलाज का क्लेम लेने के लिए पात्रता रखता है लेकिन शर्त यह है कि पॉलिसी का 30 दिन का वेटिंग पीरियड खत्म हो गया हो और वह हॉस्पिटल में एडमिट होकर कोरोनावायरस का इलाज करा रहा हो।


क्या-क्या कवर है इस बात का ध्यान रखें?
हर बीमा कंपनी के अपने नियम होते हैं, उसी हिसाब से वे पॉलिसी बनाती हैं। हेल्थ पॉलिसी खरीदने से पहले यह समझ लें कि उसमें कितना और क्या आर्थिक कवर मिलेगा? जिस पॉलिसी में ज्यादा से ज्यादा चीजें जैसे टेस्ट का खर्च और एम्बुलेंस का खर्च कवर हो उस पॉलिसी को लेना चाहिए। ताकि आपको जेब से पैसे खर्च न करने पड़ें।


पहले से मौजूद बीमारियां कवर हैं कि नहीं?
सभी हेल्थ इंश्योरेंस प्लान पहले से मौजूद बीमारियों को कवर करते हैं। लेकिन, इन्हें 48 महीने के बाद ही कवर किया जाता है। कुछ 36 महीने बाद इन्हें कवर करते हैं। हालांकि, पॉलिसी खरीदते वक्त ही पहले से मौजूद बीमारियों के बारे में बताना होता है। इससे क्लेम सेटेलमेंट में दिक्कत नहीं आती है।


निवेश करने से पहले तुलना करें
प्रीमियम राशि की तुलना हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों के साथ हमेशा करनाचाहिए जो एक जैसे फायदे देते हैं। यह सुनिश्चित करेगा कि आप अपनी हेल्थ इश्यारेंस पॉलिसी से अधिकतम लाभ प्राप्त करें।


अस्पतालों का नेटवर्क
किसी भी हेल्थ प्लान लेने से पहले सुनिश्चित करें कि आपने योजना के तहत आने वाले नेटवर्क अस्पतालों पर विचार किया है। नेटवर्क अस्पताल अस्पतालों का एक समूह हैं जो आपको अपनी वर्तमान हेल्थ प्लान को भुनाने की अनुमति देता है। हमेशा उसी प्लान के लिए जाएं जो आपके क्षेत्र में अधिकतम नेटवर्क अस्पताल प्रदान करता है अन्यथा आपका निवेश आपात स्थिति के समय में काम में नहीं आएगा।


लिमिट या सब लिमिट वाला प्लान न लें
अस्पताल में प्राइवेट रूम के किराए जैसी लिमिट से बचें। आपके लिए यह जरूरी नहीं है कि इलाज के दौरान आपको किस कमरे में रखा जाए। खर्च के लिए कंपनी द्वारा लिमिट या सब लिमिट तय करना आपके लिए ठीक नहीं है। पॉलिसी लेते समय इस बात का ध्यान रखें। सब-लिमिट का आशय री-इंबर्समेंट की सीमा तय करने से है। मसलन अस्पताल में भर्ती हुए तो कमरे के किराए पर बीमित राशि के एक फीसदी तक की सीमा हो सकती है। इस तरह पॉलिसी की बीमित राशि भले कितनी हो, सीमा से अधिक खर्च करने पर अस्पताल के बिल जेब से चुकाने पड़ सकते हैं।



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हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लेने से पहले इस बात का ध्यान रखें की इसमें सभी बीमारियों के अलावा महामारी जैसे स्वाइल फ्लू या कोरोनावायरस के इलाज का खर्च कवर है या नहीं


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