पेट्रोलियम ऑयल सेक्टर में दिखा कोरोना संकट का लाभ, तेल आयात खर्च पिछले कारोबारी साल में 10 फीसदी गिरकर 101 अरब डॉलर पर आया
पेट्रोलियम ऑयल सेक्टर में देश को कोरोना संकट का लाभ मिला है। तेल कीमतों में गिरावट और उपभोक्ता खपत घटने के कारण पिछले कारोबारी साल में देश के तेल आयात खर्च में करीब 10 फीसदी गिरावट आई है। पेट्र्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के अस्थायी आंकड़ों के मुताबिक कारोबारी साल 2019-20 में देश का तेल आयात खर्च घटकर 101.4 अरब डॉलर पर गया। इससे पिछले कारोबारी साल में देश का तेल आयात खर्च 111.9 अरब डॉलर था।
क्रूड के भाव में आई भारी गिरावट
कोरोनावायरस संकट के कारण पूरी दुनिया में मांग घटने और प्राइस वार छिड़ने से कच्चे तेल (क्रूड) की वैश्विक कीमत घटकर करीब 30 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। पिछले साल सितंबर और इस साल जनवरी में क्रूड की की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रही थी।
आयात का वॉल्यूम बढ़ने के बावजूद घटा खर्च
पिछले कारोबारी साल में तेल आयात का वॉल्यूम बढ़ने के बावजूद देश का तेल आयात खर्च कम हुआ। पिछले कारोबारी साल में तेल आयात का वॉल्यूम मामूली बढ़त के साथ 22.7 करोड़ टन पर पहुंच गया, जो इससे पिछले कारोबारी साल में 22.65 करोड़ टन था। तेल आयात खर्च में गिरावट मुख्यत: कच्चे तेल की कीमत घटने के कारण आई। मार्च में कच्चे तेल की वैश्विक कीमत में 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ गई थी।
इस साल क्रूड आयात खर्च गिरकर करीब 64 अरब डॉलर रह जाने का अनुमान
अप्रैल में क्रूड की कीमत गिरकर करीब 20 डॉलर प्रति बैरल तक चली आई थी। चालू कारोबारी साल में इसकी कीमत 30-40 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहने की उम्मीद है। इसके कारण चालू कारोबारी साल में देश का तेल आयात खर्च घटकर कई साल के निचले स्तर तक गिर जाने का अनुमान है। संभव है कि चालू कारोबारी साल 2020-21 में देश का तेल आयात खर्च घटकर 64 अरब डॉलर रह सकता है। 2016 में भी देश का तेल आयात खर्च इतना ही था। उस साल भी क्रूड की कीमत गिरकर 26 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चली आई थी।
क्रूड और रुपए में गिरावट का गणित
क्रूड की कीमत में यदि एक डॉलर की गिरावट आती है, तो देश का तेल आयात खर्च करीब 2,900 करोड़ रुपए घट जाता है। दूसरी ओर डॉलर के मुकाबले रुपए में 100 पैसे की गिरावट से देश का तेल आयात खर्च 2,700 करोड़ रुपए बढ़ जाता है।
क्रूड में गिरावट देश के लिए फायदेमंद
क्रूड भाव में गिरावट से भारत को काफी फायदा होता है, क्योंकि भारत अपनी कुल सालाना जरूरत का 86 फीसदी दूसरे देशों से खरीदता है। तेल आयात पर खर्च घटना वित्तीय घाटे के लिहाज से भी सकारात्मक है। कोरोना संकट से देश को बचाने के लिए सरकार द्वारा बढ़ाए गए खर्च के कारण देश का वित्तीय घाटा पहले ही बजटीय अनुमान से पार चले जाने की आशंका जताई जा रही है।
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